अनिल चोपड़ा, सीईओ, बजाज कैपिटल :
दरअसल म्यूचुअल फंड उद्योग का प्रदर्शन सीधे-सीधे इस बात से जुड़ा है कि विभिन्न फंड योजनाएँ जिन संपत्ति-वर्गों में निवेश करती हैं उनका प्रदर्शन कैसा रहा है।
हालाँकि सक्रिय प्रबंधन के जरिये फंड मैनेजर जोखिम या अपने प्रदर्शन में उतार-चढ़ाव को घटाने का और इस तरह मानदंड (बेंचमार्क) या संबंधित संपत्ति वर्ग की तुलना में बेहतर जोखिम-समायोजित लाभ देने का प्रयास करते हैं। इसलिए जब संबद्ध बाजार खराब प्रदर्शन कर रहे हों तो म्यूचुअल फंड योजनाओं का प्रदर्शन भी खराब होता है, लेकिन इन योजनाओं का प्रदर्शन फिर भी संबद्ध बाजार या सूचकांक से बेहतर हो सकता है।
लेकिन जनवरी 2013 से अब तक हमने देखा है कि कई सक्रिय प्रबंधन वाली इक्विटी म्यूचुअल फंड योजनाओं ने अपने मानदंड की तुलना में कमजोर प्रदर्शन किया है। इसका कारण यह है कि शेयर बाजार में काफी कम संख्या में शेयर बढ़े हैं, जबकि काफी संख्या में शेयर गिरे हैं। चढऩे वाले दिग्गज शेयर केवल एफएमसीजी, दवा और आईटी क्षेत्रों के गिने-चुने नाम हैं। लेकिन अपनी प्रकृति के अनुसार एक विविध (डाइवर्सिफाइड) इक्विटी म्यूचुअल फंड केवल गिने-चुने शेयरों या क्षेत्रों तक सीमित नहीं रह सकता, क्योंकि ऐसी रणनीति भले ही छोटी अवधि में फायदेमंद लगे, लेकिन मध्यम से लंबी अवधि में निवेशकों की संपत्ति नष्ट कर सकती है।
जुलाई 2013 में बांड और मुद्रा बाजार में काफी उतार-चढ़ाव के चलते ज्यादातर ऋण फंडों का प्रदर्शन भी कमजोर रहा है। हालाँकि लंबी अवधि वाले कुछ आक्रामक फंडों को छोड़ कर बाकी ज्यादातर ऋण फंडों ने अपने जोखिम को सीमित रखा है। जोखिम समायोजित लाभ के पैमाने पर आम तौर पर इनका प्रदर्शन संबंधित मानदंडों की तुलना में बेहतर रहा है। जिन ऋण फंडों ने अच्छी गुणवत्ता के कॉर्पोरेट बांडों में निवेश पर ध्यान दिया है, उनका नुकसान अपने मानदंड की तुलना में कम रहा है। सक्रिय प्रबंधन वाले डायनामिक बांड फंडों ने भी अपने इंडेक्स या मानदंड से बेहतर लाभ दिया है।
मुद्रा और बांड बाजार में हाल की उथल-पुथल का दर्द समय के साथ हल्का पड़ जायेगा। लेकिन रुपये में लगातार कमजोरी से छोटी अवधि में बांड और इक्विटी दोनों ही बाजारों में और समस्याएँ पैदा होंगी। इसलिए अभी निवेशकों को ज्यादा जोखिम नहीं लेना चाहिए। जोखिम उठाने की अपनी क्षमता और निवेश अवधि के अनुसार ही निवेश करना चाहिए और यह निवेश एसआईपी / एसटीपी के जरिये चरणबद्ध ढंग से करना चाहिए, ताकि छोटी अवधि के उतार-चढ़ाव का असर कम हो।
छोटी अवधि का प्रदर्शन चाहे जैसा भी हो, लोगों को ऐसी फंड योजनाओं में निवेश करना चाहिए, जिन्होंने मध्यम से लंबी अवधि में लगातार अच्छा लाभ दिया हो।
इक्विटी, विविध (डाइवर्सिफाइड)
फ्रैंकलिन इंडिया फ्लेक्सीकैप : इस फंड में ऐसे शेयरों में निवेश किया जाता है, जो अच्छे मूल्यांकन पर हों और बुनियादी रूप से मजबूत हों। हालाँकि इस फंड सभी तरह की बाजार पूँजी (मार्केट कैपिटलाइजेशन) वाले शेयरों को चुना जाता है, पर अभी इस फंड का झुकाव दिग्गज शेयरों की ओर ज्यादा है। इसने अपनी 62% शुद्ध संपत्तियों का निवेश दिग्गज शेयरों में कर रखा है। इसके पोर्टफोलिओ में सबसे ज्यादा निवेश वाले तीन शेयर भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक और इन्फोसिस हैं। एक साल, तीन साल और पाँच साल की अवधि में इस फंड ने अपने मानदंड बीएसई 500 से काफी बेहतर प्रदर्शन किया है।
संतुलित (बैलेंस्ड)
एसबीआई मैग्नम बैलेंस्ड : यह इक्विटी की ओर रुझान वाला संतुलित फंड है, जिसके निवेश में इक्विटी की हिस्सेदारी 75.12% है। इसने 2005, 2006 और 2007 में शेयर बाजार की तेजी के दौरान अपने मानदंड क्रिसिल बैलेंस्ड फंड इंडेक्स से बेहतर लाभ दिया, पर 2008 और 20११ में गिरावट के समय इसका प्रदर्शन मानदंड से कमजोर रहा, लेकिन 2012 में इसने अपनी श्रेणी में दूसरा सबसे अच्छा लाभ हासिल किया। जोखिम समायोजित लाभ के पैमाने पर इसका शार्पे अनुपात -0.03 है, जो क्रिसिल बैलेंस्ड इंडेक्स के -0.09 से बेहतर है।
ईएलएसएस
ऐक्सिस लॉन्ग टर्म इक्विटी : दिसंबर 2009 में शुरू होने के बाद से इस फंड ने लगातार अपने मानदंड बीएसई 200 से बेहतर प्रदर्शन किया है। इस फंड में दिग्गज शेयरों का अनुपात कम है। इसका ज्यादा निवेश मँझोले और छोटे शेयरों में है। बीते तीन सालों का इसका अल्फा 7.49% है, यानी इसने मानदंड से इतना अधिक बेहतर लाभ दिया है।
इंडेक्स फंड
एचडीएफसी निफ्टी प्लान : हर पोर्टफोलिओ में कुछ आवंटन इंडेक्स फंड में जरूर करना चाहिए। इनमें लागत कम होती है, जिससे लाभ ज्यादा मिलता है। इंडेक्स फंड का चुनाव लंबी अवधि में ट्रैकिंग एरर यानी इंडेक्स की तुलना में प्रदर्शन के अंतर और लागत कम होने के आधार पर करना चाहिए। एचडीएफसी निफ्टी प्लान का ट्रैकिंग एरर 0.46 है, जो निफ्टी इंडेक्स फंडों के औसत 1.57 से कम है। इसका व्यय अनुपात (एक्सपेंस रेश्यो) केवल 0.30 है, जबकि इस श्रेणी का औसत 1.24 का है।
दिग्गज (लार्जकैप) फंड
बिड़ला सन लाइफ फ्रंटलाइन इक्विटी : इस फंड ने साल 2003 से ही अब तक केवल 2011 को छोड़ कर हर साल अपनी श्रेणी की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। साल 2008 में इसकी गिरावट बीएसई 200 और अपनी श्रेणी के औसत से कम रही, जबकि 2009 की उछाल में इसने दोनों से कहीं बेहतर बढ़त दर्ज की।
मँझोले और छोटे शेयरों के फंड
फ्रैंकलिन इंडिया स्मॉलर कंपनीज : इस श्रेणी के फंड ज्यादा जोखिम के साथ ज्यादा लाभ की संभावना वाले फंड होते हैं। फ्रैंकलिन स्मॉलर कंपनीज ने 2009 से अब तक सीएनएक्स मिडकैप से बेहतर प्रदर्शन किया है, केवल 2010 को छोड़ कर। बीते पाँच सालों में इसने सालाना औसतन 9.99% लाभ दिया है।
विशेष क्षेत्र और विषय (थीम) के फंड
बिड़ला एमएनसी : इस श्रेणी के फंड छोटी से मध्यम अवधि में ज्यादा जोखिम वाले माने जाते हैं, पर पाँच साल से अधिक अवधि में इनका जोखिम-लाभ अनुपात विविध इक्विटी फंडों के जैसा होता है। बिड़ला एमएनसी विभिन्न क्षेत्रों की एमएनसी कंपनियों की अच्छी विविधता वाला फंड है। इसने साल 2010 से अब तक सीएनएक्स एमएनसी से बेहतर लाभ दिया है। बीते एक, दो, तीन और पाँच सालों में यह सबसे अच्छा लाभ देने वाले शीर्ष एक चौथाई फंडों में शामिल रहा है।
ऋण (डेट), लंबी अवधि के ऋण
टेम्प्लेटन इंडिया कॉरपोरेट बॉण्ड अपॉर्चुनिटीज फंड : यह फंड मुख्य रूप से कॉर्पोरेट ऋण प्रपत्रों में निवेश करता है। इस फंडका प्रयास रहता है कि इसके पोर्टफोलिओ में शामिल ऋण प्रपत्रों की औसत परिपक्वता अवधि 36 महीने से ज्यादा न हो। साल 2012 में इसका प्रदर्शन अपनी श्रेणी की तुलना में बेहतर रहा है।
छोटी अवधि के ऋण
टेम्पलेटन इंडिया शॉर्ट टर्म इन्कम प्लान : इस फंड ने लगातार ही अलग-अलग अवधियों में अपनी श्रेणी के ज्यादातर फंडों की तुलना में अच्छा लाभ दिया है। यह फंड खरीद कर रखे रहने की रणनीति अपनाता है, जिससे इसे ऊँची प्राप्ति (एक्रुअल) का फायदा मिले। बीते तीन सालों के लिए इसका शार्पेे अनुपात 0.77 है, जो क्रिसिल शॉर्ट टर्म बॉण्ड इंडेक्सके 0.19 से काफी ज्यादा है।
गिल्ट
एसबीआई मैग्नम गिल्ट फंड : गिल्ट भी आम तौर पर लंबी अवधि के ऋण फंड ही होते हैं। पर इनका निवेश केवल सरकारी प्रतिभूतियों (जीसेक) में होता है। लिहाजा इनमें पूँजी के नुकसान की आशंका लंबी अवधि के अन्य ऋण फंडों से कम होती है, जो कॉर्पोरेट ऋण पत्रों में भी निवेश करते हैं। पर याद रखें कि गिल्ट फंड ऊँचे जोखिम पर ऊँचे लाभ वाले फंडों की कतार में आते हैं। ये उन निवेशकों के लिए हैं जो लगातार इनके प्रदर्शन पर निगाह रखें और उचित समय पर मुनाफावसूली कर सकें। एसबीआई मैग्नम गिल्ट फंड ने बॉण्ड बाजार के उतार-चढ़ाव को अपनी श्रेणी के अन्य फंडों की तुलना में कहीं अच्छे ढंग से सँभाला है। इस साल अब तक (जनवरी से 02 अगस्त तक) जहाँ इस श्रेणी का औसत लाभ 3.09% है, वहीं एसबीआई मैग्नम गिल्ट ने 5.96% लाभ दिया है। तीन साल की अवधि में भी यह सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले शीर्ष एक चौथाई फंडों में शामिल रहा है।
तरल (लिक्विड) फंड
यूटीआई ट्रेजरी एडवांटेज : बेहद छोटी अवधि के ऋण फंडों में यह सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले शीर्ष एक चौथाई फंडों की कतार में रहा है। इसने 2008 से अब तक हर साल अपनी श्रेणी की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। क्रिसिल लिक्विड फंड इंडेक्स के 0.25 के शार्पे अनुपात के मुकाबले इसका शार्पे अनुपात 0.67 है।
आक्रामक एमआईपी
सुंदरम एमआईपी मॉडरेट प्लान : इस फंड में कम-से-कम 80% निवेश ऋण में और 0-20% निवेश इक्विटी में करने का नियम है। अभी इस फंड का निवेश पूरी तरह से ऋण में है और इक्विटी में इसका निवेश शून्य है। इसके पोर्टफोलिओ में एएए रेटिंग वाले बॉण्डों की अधिकता है, जबकि अपनी श्रेणी के औसत की तुलना में इसने एए रेटिंग वाले बॉण्डों में कम निवेश किया है। इसने इस साल अब तक 2.72% का लाभ दिया है।
संकोची (कंजर्वेटिव) एमआईपी
एसबीआई मैग्नम एमआईपी : जोखिम समायोजित लाभ और श्रेणी के औसत से अच्छा लाभ पाने के लिहाज से यह अपनी श्रेणी के शीर्ष फंडों में से एक है। यह एक से तीन साल तक में सबसे अच्छे लाभ वाले एक चौथाई शीर्ष फंडों में शामिल है। साल 2012 में इसने अपनी श्रेणी के औसत लाभ 12.27% की तुलना में 15.43% का लाभ दिया है।
(निवेश मंथन, अगस्त 2013)