बृजेश श्रीवास्तव :
ग्रेटर नोएडा को त्योहारों का मौसम शुरू होते ही तोहफा मिला है।
ग्रेटर नोएडा और नोएडा के बीच मेट्रो की परियोजना को उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल से हरी झंडी मिल गयी है। ग्रेटर नोएडा तक मेट्रो आने से यह इलाका राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) खास कर दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुडगाँव से अच्छी तरह जुड़ जायेगा। मेट्रो के तृतीय चरण में बोटैनिकल गार्डन से जनकपुरी वेस्ट कॉरिडोर तैयार हो जायेगा। इसके कारण ग्रेटर नोएडा से दक्षिण दिल्ली और पश्चिम दिल्ली आना-जाना आसान हो जायेगा और लोग करीब सवा घंटे में दक्षिण दिल्ली के कालकाजी और नेहरू प्लेस पहुँच सकेंगे। इस परियोजना पर शहरी विकास मंत्रालय से स्वीकृति मिलने और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) के साथ समझौता होने के बाद काम शुरू हो सकेगा।
इस परियोजना में कुल 22 स्टेशन होंगे, जिनमें 13 भूतल स्तर पर होंगे जबकि 7 एलिवेटेड होंगे। इनमें से दो स्टेशन भविष्य के विस्तार में ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क-1 एवं सेक्टर डेल्टा-1 में बनाये जायेंगे। नोएडा के सेक्टर-32 सिटी सेंटर से शुरू होकर यह नोएडा के सेक्टर-50, 51, 78, 101, 81, दादरी रोड, सेक्टर 83, 85, 137, 142, 143, 144, 147, 153 एवं सेक्टर 149 में प्रस्तावित स्टेशनों से होती हुई नॉलेज पार्क-2 से ग्रेटर नोएडा में दाखिल होगी तथा परी चौक, सेक्टर अल्फा-1 और अल्फा-2 होती हुई डिपो स्टेशन पर समाप्त होगी।
आम्रपाली समूह के सीएमडी अनिल कुमार शर्मा बताते हैं कि इस खबर के बाद ग्रेटर नोएडा में उनकी परियोजनाओं में ग्राहकों की दिलचस्पी बढ़ी है। उनकी ग्रेटर नोएडा की परियोजनाओं में करीब डेढ़ हजार फ्लैट उपलब्ध हैं, जिनके लिए पूछताछ करने वालों की संख्या के साथ-साथ बिक्री भी पहले से बढ़ गयी है।
उन्हें उम्मीद है कि त्योहारों का मौसम होने के चलते अभी बिक्री और बेहतर होगी, लेकिन उन्होंने इसके मद्देनजर कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। वे कहते हैं, ‘अभी तक ग्रेटर नोएडा में माँग कमजोर थी, ऐसे में अगर हमने कीमतें बढ़ायीं तो जो माँग आनी शुरू हुई है, वह फिर से घट जायेगी।’ लिहाजा कीमतें बढ़ाने के बदले वे बढ़ी हुई माँग से ही संतुष्ट हैं।
श्री इन्फ्राटेक के सलाहकार कुणाल बनर्जी का मानना है कि मेट्रो से ग्रेटर नोएडा के दिल्ली से संपर्क को लेकर लोगों की चिंता दूर हो सकेगी। वे कहते हैं, ‘भले ही मेट्रो के पहुँचने में चार-पाँच साल लगेंगे, लेकिन इससे अब लोगों में एक भरोसा होगा। ग्रेटर नोएडा से आने-जाने के लिए एक्सप्रेसवे के अलावा एक और भरोसेमंद जरिया मिलने से अब डेवलपरों को इस क्षेत्र में अपनी परियोजनाओं के लिए उचित कीमत मिल सकेगी।’
हालाँकि बनर्जी के मुताबिक कीमतों में अभी तुरंत वृद्धि नहीं होगी। क्यूबरेक्स के एमडी संजय शर्मा की भी यही राय है। उनके मुताबिक ग्रेटर नोएडा में मेट्रो जाने का प्रस्ताव पहले से चल रहा था, लिहाजा इस बात को लेकर कीमतों पर आगे तभी असर दिखेगा, जब मेट्रो का निर्माण एक ठीक-ठाक स्तर पर पहुँच जायेगा।
मेट्रो निर्माण से जुड़े जानकारों का मानना है कि नोएडा से ग्रेटर नोएडा को जोडऩे देने वाली परियोजना 2018-19 में बन कर तैयार हो पायेगी। डीएमआरसी से समझौता होने के बाद इस परियोजना को पूरा होने में करीब पाँच वर्ष का समय लग जायेगा। डीएमआरसी से समझौता होने के बाद एक साल टेंडर और शिलान्यास वगैरह में लगेंगे। फिर निर्माण में साढ़े तीन से चार वर्ष का समय लग जायेगा।
इसके अलावा केंद्र सरकार से मदद लेने के लिए परियोजना को शहरी विकास मंत्रालय और फिर केंद्रीय मंत्रिमंडल के समूह से अनुमति की जरूरत होगी। अभी केवल उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल से स्वीकृति मिली है। अगर लोकसभा चुनाव से पूर्व केंद्र से अनुमति नहीं मिली तो यह परियोजना अगली सरकार पर निर्भर हो जायेगी। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में सचिव स्तर पर कॉरिडोर निर्माण को 23 जुलाई 2013 को अनुमति मिली थी और प्रदेश के मंत्रिमंडल से स्वीकृति मिलने में दो महीने 10 दिन लग गये।
ग्रेटर नोएडा-दिल्ली हवाई अड्डे के बीच मेट्रो की योजना
इस बीच ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी बोड़ाकी से इंदिरा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक भी एक नये मेट्रो की योजना तैयार कर रही है। इस मार्ग पर मेट्रो 160 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज रफ्तार से चलेगी। यह रास्ता कुल 66 किलोमीटर लंबा होगा। इसमें पाँच स्टेशन बनाने का प्रस्ताव है। इसमें बोड़ाकी, परी चौक, फरीदाबाद, गुडगाँव और अतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के समीप स्टेशन होंगे।
मेट्रो के नाम पर डेवलपरों ने काटी चाँदी
मेट्रो के नाम पर कई डेवलपरों ने पहले ही काफी चाँदी काटी है। पिछले साल तक मीडिया में खबरें आ रही थीं कि नोएडा एक्सटेंशन तक मेट्रो को मंजूरी मिल गयी है। इस खबर के बाद मेट्रो से नजदीकी के नाम पर दाम बढ़ा दिये गये थे। उस समय खबर आयी थी कि नोएडा बोर्ड और ग्रेटर नोएडा बोर्ड ने मेट्रो का विस्तार नोएडा एक्सटेंशन तक करने और मेट्रो रेल को ग्रेटर नोएडा के अन्य हिस्सों तक ले जाने को मंजूरी दे दी है। इन प्राधिकरणों के तत्कालीन अध्यक्ष ने कहा था कि बोर्ड ने सैद्धांतिक रूप से मेट्रो का विस्तार नोएडा से नोएडा एक्सटेंशन तक करने को मंजूरी दे दी है। लेकिन जनवरी 2013 में नोएडा और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने साफ कर दिया कि फिलहाल नोएडा एक्सटेंशन में मेट्रो ले जाने का कोई इरादा नहीं है। इसके बदले दो साल पुराने फॉर्मूले पर ही सेक्टर 50, 51, 82 से एक्सप्रेस वे होते हुए बोड़ाकी तक मेट्रो जायेगी।
(निवेश मंथन, अक्तूबर 2013)