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- Category: सितंबर 2013
राजेश रपरिया, सलाहकार संपादक :
हर बार ऐसा लगता है कि देश की अर्थव्यवस्था का भयावह दौर अब खत्म होने वाला है, पर ताजा प्रमुख आर्थिक आँकड़े देख कर यह स्थिति और भयावह लगती है।
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- Category: सितंबर 2013
सुशांत शेखर :
जमीन अधिग्रहण के नये कानून और आवास ऋण (होम लोन) की 80:20 योजना पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की सख्ती से देश में जमीन-जायदाद (रियल एस्टेट) क्षेत्र की कंपनियों की मुश्किलें और बढऩे जा रही हैं।
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- Category: सितंबर 2013
आरबीआई ने 80:20 योजनाओं पर जो रोक लगायी है, उसके दायरे में ज्यादा बिल्डर नहीं आते हैं।
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- Category: सितंबर 2013
डोलती अर्थव्यवस्था और टूटते रुपये के बीच निवेश के सुरक्षित ठिकानों की तलाश
बाजार में कर्ज और नकदी की उपलब्धता में कमी, ऊँची ब्याज दरों, डॉलर के मुकाबले रुपये की बढ़ती कमजोरी और विभिन्न परियोजनाओं में निवेश के मोर्चे पर देरी से देश की अर्थव्यवस्था ठहर सी गयी है।
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- Category: सितंबर 2013
इससे पहले शायद ही किसी आरबीआई गवर्नर को ‘रॉकस्टार’ कहा गया हो।
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- Category: सितंबर 2013
ऐसे माहौल में जो निवेशक अधिक जोखिम नहीं लेना चाहते, वे ऋण (डेट) बाजार का रुख कर सकते हैं।
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- Category: सितंबर 2013
पंकज पांडेय, रिसर्च प्रमुख, आईसीआईसीआई डायरेक्ट :
निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि इक्विटी यानी शेयर और ऋण (डेट) में निवेश की तुलना ठीक नहीं है।
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- Category: सितंबर 2013
रितेश कुमार सिंह, अर्थशास्त्री, रेमंड समूह :
डॉ. रघुराम राजन बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े जाने-माने अर्थशास्त्री हैं।
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- Category: सितंबर 2013
आशीष पार्थसारथी, ट्रेजरर, एचडीएफसी बैंक :
रघुराम राजन के नये गवर्नर बनने से जहाँ तक बाजार में उत्साह आने की बात है, हमें ध्यान रखना चाहिए कि बुनियादी बातों (फंडामेंटल) में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
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- Category: सितंबर 2013
तीर्थंकर पटनायक, अर्थशास्त्री, रेलिगेयर सिक्योरिटीज :
हमारा अनुमान है कि 2013-14 में भारत की विकास दर 4.5% रहेगी, लेकिन इस अनुमान में और भी कमी आने की संभावना बनती है।
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- Category: सितंबर 2013
सुशांत शेखर :
देश के लगातार बिगड़ते आर्थिक माहौल में एक-एक पैसे का मोल है।
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- Category: सितंबर 2013
बीती अप्रैल-जून तिमाही के दौरान भारतीय उद्योग जगत का प्रदर्शन मोटे तौर पर निराशाजनक ही रहा है।
अर्थव्यवस्था
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